
Modi government will now give a big gift to small borrowers, loans will be waived!
मोदी 2.O ने सत्ता संभालते ही मानो अपने पहले कार्यकाल से भी तेजी से कम करने की ठान ली है, तभी तो सत्ता में आते ही सबसे पहले तो भारत के अन्नदाता की मुश्किलों को आसान किया ।
अपने पहले कैबिनेट की बैठक में किसानों के लिए पेंशन योजना की शुरुआत कर दी, प्रधानमंत्री पेंशन योजना के तहत गरीब किसानों को तीन हज़ार रुपए पेंशन देने को मंजूरी दी।
और अब उसके बाद छोटे कारोबारियों के लिए मोदी सरकार तोहफा लेकर आई है. यानि कि अगर आप छोटे कारोबारी हैं और कर्ज के बोझ तले दबे हुए हैं तो अब आपको बिल्कुल भी परेशान होने की जरूरत नहीं है, क्योंकि मोदी सरकार ने आपके कर्ज को चुकाने का बड़ा प्लान बना लिया है।
सरकार ने इंसॉल्वेंंट बैंक ग्रफसीी कोर्ट के तहत छोटे कर धरकों का कर्ज माफ करने की योजना बना ली है।
योजना आईबीसी के प्रावधानों के तहत बनाई गई है, जिसके तहत देश के लाखों लोगों को फायदा होने वाला है. कॉपोरेट मामलों के सचिव श्रीनिवास के मुताबिक देश में अभी कई लोग ऐसे हैं जिनके पास कर्ज चुकाने का पैसा नहीं है. जिसके चलते कई लोग मौत को गले लगा रहे हैं, आत्महत्या कर रहे हैं. छोटे कारोबारी ऐसा ना करें इसके लिए सरकार माइक्रोफाइनेंस इंडस्ट्री से बात कर रही है. साफ किया गया है कि यह लोन मागत दिवालियापन से जुड़े मामलों में ही दी जाएगी. जो की आर्थिक रूप से कमजोर, गरीब और दबे हुए तब को ही ज्यादा परेशान करती. लाभ पाने के लिए कुछ शें भी की गई. अगर नियमों का सही तरीके से पालन किया गया तभी मोदी सरकार के इस योजना का फायदा छोटे क धारकों को मिल सकेगा कि कि शर्तों को पूरा करना होगा.
सबसे पहले तो लोन माफ योजना के लाभार्थी की वार्षिक औसत सा हज़ार से ज्यादा नहीं होनी चाहिए. कर्ज धारक के पास एस की सकल वैल्यू बीस हज़ार से ज्यादा नहीं होनी चाहिए. लाभार्थी पर कर्ज की कुल राशि पैंतीस हजार से ज्यादा नहीं होनी चाहिए. लाभर्थी के पास अपना खुद का आवास भी नहीं होना चाहिए।
अगर इन शर्तक पूरा करता होगा तभी उसे मोदी सरकार के इस योजना का लाभ मिल पाएगा. अब आपको इस योजना से जुड़ी एक और हम बात बताते हैं वो ये कि अगर किसी भी व्यक्ति ने एक बार सरकार की योजना का लाभ ले लिया तो आने वाले पाँच साल तक इसका लाभ नहीं ले पाएगा. आने वाले तीन से चार साल में सरकार क्षेत्र में और नए बदलाव कर सकती है. फिलहाल इस योजना को राष्ट्रीय स्तरा पर लागू करने में ही सरकार को अभी करीब चार साल का समय लग सकता है, क्योंकि इसके लिए सरकार को करीब दस हजार करोड़ रुपए का इंतजाम करना होगा.
कि अगर कोई्सक्राइ लाभ नहीं लेना चाहता है तो उसके पास इस योजना का फायदा नहीं उठाने का भी विकल्प रहेगा क्योंकि संभव है कि लोग कर्ज माफी के ऑप्शन को क्रेडिट हिस्ट्री पर असर से जोड़कर देखें. इसके लिए इंसॉल्वेंसी और बैंकप्स कोड आईबीसी यानी दिवाली अपन कानून में भी बदलाव किया जा सकता है. अभी दिवालिया कानून में छोटे कर्जदारों के लिए अलग से कोई नियम नहीं बनाया गया है।
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